(रशीद क़ुरैशी)
महोबा जिले में सरकारी निर्माण कार्यों में फर्जी रॉयल्टी के जाल को तोड़ने की दिशा में एक बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। जिलाधिकारी गजल भारद्वाज के कड़े निर्देशों पर विभागीय जांच तेज हो चुकी है, जिससे कथित ठेकेदारों और फर्मों की नींद उड़ गई है। सूत्रों के मुताबिक, अप्रैल 2025 से अब तक के निर्माण कार्यों में लगी अधिकांश रॉयल्टी फर्जी साबित हो रही हैं, और इससे उजागर होने वाले घोटाले का आकार करोड़ों में हो सकता है। यह कार्रवाई न केवल राजस्व की लूट को रोकने में मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जिले में नई मिसाल भी कायम करेगी।
जिले के विभिन्न सरकारी विभागों, खासकर लोक निर्माण,लघु सिंचाई और नगर पालिका ,नगर पँचायत जैसे क्षेत्रों में ठेकेदारों द्वारा फर्जी प्रपत्रों का इस्तेमाल कर सरकार को बेतहाशा नुकसान पहुंचाया गया है।इन ठेकेदारों ने नकली रॉयल्टी रसीदें लगाकर निर्माण सामग्री की आपूर्ति का दावा किया, जबकि वास्तविकता में कोई भुगतान नहीं हुआ। इससे राज्य के राजस्व को भारी चपत लगी, और विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत भी स्पष्ट हो रही है। जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि इन फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया और संबंधित बाबुओं पर सख्त कार्रवाई हुई, तो भविष्य में ऐसी धांधली पर पूर्ण रोक लग सकती है।
आपको बता दे कि जिले के कई विभागों में जांच पोर्टल की अनुपस्थिति ने फर्जी रॉयल्टी माफिया को खुली छूट दे दी थी। पूर्व के निर्माण कार्यों में लगी रॉयल्टियां यदि अब पोर्टल के माध्यम से सत्यापित हो जाती हैं, तो एक बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। जिलाधिकारी गजल भारद्वाज ने हाल ही में सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश जारी किए हैं कि अप्रैल 2025 से चली आ रही फाइलों में रॉयल्टी की डिजिटल जांच अनिवार्य रूप से कराई जाए। सूत्रों की माने तो प्रारंभिक जांच में ही एक बड़े विभाग की रॉयल्टियां फर्जी पाई गई हैं, जिससे संबंधित ठेकेदारों पर कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं।
गौरतलब हो कि”भ्रष्टाचार जिले के विकास में सबसे बड़ी बाधा है। अगर हर स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित हो। फर्जी दस्तावेजों की जांच से न केवल राजस्व की रक्षा होगी, बल्कि ईमानदार कर्मचारियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।” जिलाधिकारी के नेतृत्व में गठित जांच समिति अब विभागवार फाइलों की छानबीन कर रही है। जिले के जागरूक नागरिकों ने इस कदम का स्वागत किया है। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “लंबे समय से यह समस्या चली आ रही थी। डीएम सराहनीय कार्य कर रही हैं। यदि फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया, तो ठेकेदारों में भय का माहौल बनेगा।”
यह कार्रवाई महोबा को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल पोर्टल का विस्तार और सख्त निगरानी से जिले का राजस्व मजबूत होगा। फिलहाल, ठेकेदारों में हड़कंप मचा हुआ है।