(रशीद क़ुरैशी)
महोबा। जिले के बाशिंदों के लिए रेलवे निर्माण विभाग की “सौगातें” अब सिरदर्द बन चुकी हैं। विकास के नाम पर दी गई सुविधाएँ अब जनता की मुसीबत में तब्दील हो चुकी हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बने अंडर पास अब तालाब बनकर जनता की राह रोक रहे हैं।

करीब 5 वर्ष पूर्व महोबा शहर से 7 किलोमीटर दूरी पर रेलवे निर्माण विभाग ने संख्या 1260 अंडर पास का निर्माण कराया था। उद्देश्य था – लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिले। मगर, हुआ इसका उल्टा। स्थानीय लोगों की माने तो साल भर में सिर्फ मई-जून के दो महीनों में ही यहाँ से गुज़रना संभव होता है। बाकी पूरे साल यह “रेलवे की सौगात” डूबकर पानी-पानी रहती है।

बरसात होते ही अंडर पास झील बन जाता है। आसपास के लोगों को लंबी दूरी से घूमकर गुजरना पड़ता है। स्कूल जाने वाले बच्चे, मरीज और कामकाजी लोग रोजाना जोखिम उठाकर पटरी पार करने को मजबूर हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं, जबकि कागज़ों में मोटी धनराशि खर्च दिखा दी गई है। ड्रेनेज सिस्टम से लेकर टीन शेड की गुणवत्ता तक सबकुछ “कागज़ी विकास” का नमूना है।
रेलवे निर्माण विभाग के अफसरों ने जनता को सुविधा नहीं, बल्कि धन बंदरबांट का नज़ारा दिखाया है। सवाल ये उठता है — अगर ड्राइंग सही होती, और काम गुणवत्ता के अनुसार कराया गया होता, तो आज यह अंडरपास जलभराव की वजह से अभिशाप न बनता।