(रशीद कुरैशी )
महोबा में साईं इंटर कॉलेज प्रबंधन की हद दर्जे की लापरवाही और दबंगई अब खुलकर सामने आ चुकी है। परिवहन विभाग पहले ही साफ चेतावनी दे चुका था, नोटिस थमाया जा चुका था कि बिना फिटनेस स्कूल बस सड़क पर नहीं दौड़ेगी — लेकिन नियमों को ठेंगा दिखाकर संजय साहू और उनका स्कूल प्रबंधन बच्चों की जान को दांव पर लगाकर बस दौड़ाते रहे।
नतीजा वही हुआ, जिसका डर था…
एक मासूम जिंदगी इस लापरवाही की भेंट चढ़ गई।
साईं इंटर कॉलेज के जिम्मेदारो ने नोटिस को सिर्फ मजाक बनाकर ही समझा आपको बतादे की एआरटीओ विभाग महोबा द्वारा स्पष्ट रूप से नोटिस देकर कहा गया था कि बस की फिटनेस खत्म है, उसे तत्काल दुरुस्त कराए बिना सड़क पर न उतारा जाए। लेकिन सवाल ये है क्या संजय साहू प्रबंधन टीम ने खुद को कानून से ऊपर समझ लिया या फिर रसूख के नशे में नियमों को कुचलना उनकी आदत बन चुकी थी?ये कोई एक दिन की गलती नहीं थी, बल्कि लगातार चल रही लापरवाही थी। रोजाना मासूम बच्चों को उसी “मौत की बस” में बैठाकर सड़क पर उतारा जा रहा था।
न कोई डर, न कोई जिम्मेदारी… सिर्फ ठसक!

जब हादसा हो गया, एक मासूम की सांसें थम गईं, तब जाकर विभाग और पीड़ित परिवार की तहरीर पर संजय साहू, स्कूल प्रबंधन, प्रधानाचार्य और ड्राइवर पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है!नोटिस के बाद यह हादसा नहीं, बल्कि संजय साहू और स्कूल प्रबंधन की जिद, लापरवाही और कानून की अवहेलना का सीधा नतीजा है। जिसे मासूम को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा!
