(रशीद कुरैशी )
महोबा में साईं इंटर कॉलेज की बस से हुए दर्दनाक हादसे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस वाहन ने मासूम समर की जान ली, वही बस रोज सैकड़ों बच्चों को लेकर सड़कों पर दौड़ रही थी—वो भी बिना फिटनेस के।

सूत्रों के मुताबिक, यह स्कूली वाहन पूर्व बीएसपी प्रत्याशी संजय कुमार साहू के नाम दर्ज है। हैरानी की बात यह है कि बस की फिटनेस 5 जनवरी को ही खत्म हो चुकी थी, इसके बावजूद वाहन खुलेआम सड़कों पर चल रहा था।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है की क्या यह वाहन किसी रसूख और दबाव के चलते बिना फिटनेस के दौड़ता रहा? और
क्या जिम्मेदार विभाग ने जानबूझकर आंखें मूंद लीं थी
जो हर दिन खतरे में थे बच्चों के जान बनी हुई थी 
यह कोई एक दिन की लापरवाही नहीं थी। यही बस रोज स्कूल के बच्चों को लाती-ले जाती थी। यानी हर दिन सैकड़ों मासूमों की जान जोखिम में डाली जा रही थी। अगर यह हादसा पहले होता तो नुकसान और भी बड़ा हो सकता था।

इस हादसे के बाद भी सवालों का अंबार लग गया है
ड्राइवर की लापरवाही से हुआ हादसा तो सबके सामने है, लेकिन उससे भी बड़ा सवाल सिस्टम की जवाबदेही पर है। आखिर कैसे एक बिना फिटनेस वाला वाहन खुलेआम दौड़ता रहा?

कॉलेज के जिम्मेदार और वाहन स्वामी संजय कुमार साहू पर भी उठे सवाल जायज है की वाहन मालिक होने के नाते संजय कुमार साहू की जिम्मेदारी भी तय होती है। क्या उन्होंने जानबूझकर नियमों की अनदेखी की? और बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया गया!इस मामले में सिर्फ ड्राइवर नहीं, बल्कि वाहन मालिक और संबंधित अधिकारियों की भी जांच होनी चाहिए।

क्योंकि यह सिर्फ एक हादसा नहीं—बल्कि लापरवाही, रसूख और सिस्टम की नाकामी का नतीजा है। अगर समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे ‘मौत के वाहन’ फिर किसी और घर का चिराग बुझा सकते हैं।